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AYYAS SHERA

S LIONRAJA FILM STUDIO

Dec 12, 2025 Authur by I

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AYYAS SHERA YE ANE WALI FILM STROY HAI

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ayayas shera

आगरा के पुराने लेकिन रईस इलाक़े में बना “युवान विला” दूर से ही अपनी चमक से लोगों को चौंका देता है ऊँची दीवारें, बड़े-बड़े शीशे वाले खिड़कीदार कमरे, अंदर महंगे झूमर, विदेशी कारों की लाइन और नौकरों की भीड़, इस चमक के बीच, सुबह के दस बजे भी किसी कमरे की खिड़की से शराब के ग्लास की झंकार सुनाई देती है वही कमरा है जहाँ 28 साल का युवान, आधी रात की पार्टी के बाद भी पूरी तरह होश में नहीं आया बिखरे बाल, महंगा टी-शर्ट, आँखों के नीचे हल्के काले घेरे और टेबल पर सजी हुई तरह–तरह की महंगी शराब की बोतलें, जैसे यह उसका असली परिवार हो,

युवान एक अमीर कारोबारी, जगदीश सिंह का इकलौता बेटा है शहर में लोग जब उसके बारे में बात करते हैं तो बिज़नेस से ज्यादा उसकी अय्याशी के किस्से चलते हैं कॉलेज के टाइम से ही रात की महफिलें, लड़कियाँ, ड्रग्स, रेसिंग, सब उसके शौक बन गए शुरू में जगदीश सिंह ने सोचा कि उम्र की नादानी है, सुधर जाएगा, लेकिन धीरे–धीरे ये नादानी उसकी पहचान बन गई अब हाल ये है कि रात को जो लोग ऑफिस से थके हुए अपने बच्चों के साथ डिनर करते हैं, उसी वक्त युवान किसी क्लब में फ्लैश लाइट के नीचे बोतलें खाली कर रहा होता है,

एक शाम क्लब की तेज़ आवाज़ के बीच युवान ने फिर एक बार शराब का पेग उठाया, उसके दोस्त चीख रहे थे “युवान, तू ही तो राजा है, जिंदगी एक बार मिली है फुल इंजॉय कर, डांस फ्लोर पर लाइट्स उसके चेहरे पर गिर रही थीं और वह मुस्कुराते हुए बोला, जिंदगी से ज़्यादा भरोसा तो मुझे इन बोतलों पर है इतनी शराब पीकर भी उसे डर सिर्फ एक चीज़ का था अकेलेपन का, भीड़ में घिरा रहने वाला यह लड़का, अपने कमरे में जाते ही अंदर से बिल्कुल खाली महसूस करता था लेकिन इस खालीपन को वह और शराब से भरने की कोशिश करता,

घर में मगर एक खामोशी थी जो क्लब की आवाज़ से बिल्कुल उलट थी जगदीश सिंह की तबीयत कई महीनों से खराब चल रही थी दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर और पुराना बिज़नेस का तनाव, सब मिलकर उन्हें अंदर से तोड़ रहे थे डॉक्टरों ने साफ कहा था कि अब उन्हें शांति, आराम और अपने बेटे का साथ चाहिए। नौकरों ने कई बार युवान को फोन किया, लेकिन हर बार उसके फोन पर वही जवाब आता, बता देना, मैं किसी मीटिंग में हूँ दरअसल वह मीटिंग, शराब की बोतल और डीजे की बीट के बीच हो रही होती थी,

एक रात क्लब से निकलते वक्त हल्की बारिश हो रही थी सड़क गीली थी, लेकिन युवान की स्पोर्ट्स कार ज़िद पर थी और उसके दोस्त उसे उकसा रहे थे शराब की मदहोशी में उसने गाड़ी तेज़ कर दी, कर्ब के पास से गुजरते हुए उसकी कार अचानक स्लिप हो गई, सड़क किनारे लगे बैरिकेड से टकराई, और कार घूमते हुए रुक गई कुछ लोगों की चीख सुनाई दी, कुछ मोबाइल कैमरे ऑन हो गए युवान के सिर से थोड़ा खून बहा, लेकिन उसकी जान बच गई, पुलिस आई, एम्बुलेंस आई, और कुछ घंटों बाद वह अस्पताल के बेड पर लेटा था आँखों पर हल्का पट्टा, हाथ में सलाइन की बोतल, और आसपास एंटीसेप्टिक की खुशबू,

यहीं पहली बार उसकी मुलाकात माया से हुई माया वही लड़की थी जो कभी उसके स्कूल की टॉपर हुआ करती थी शांत-सी, सीधी-सी, लेकिन आँखों में अजब सा आत्मविश्वास अब वह एक एनजीओ चलाती थी जो नशा छोड़ने वालों की मदद करता था अस्पताल के कॉरिडोर में जब उसने युवान का नाम सुना, तो उसे यकीन ही नहीं हुआ कि यह वही लड़का है जो कभी क्लास में सबसे तेज़ भागता था जिसे खेल में मेडल मिले थे, जो एक समय अपने पिता के साथ अनाथ बच्चों के बीच मिठाई बाँटता था कमरे में जाकर उसने देखा – वही युवान, पर अब आँखों में लालपन, चेहरे पर थकान और बाजू पर शराब के इंजेक्शन से बने निशान,

“कैसे हो, युवान?” माया ने धीमी आवाज़ में पूछा युवान ने आँखें खोलीं, उसे कुछ पल तक घूरता रहा, फिर हल्की हँसी के साथ बोला, तुम लोग अभी तक सुधरने वाली बातें कर रही हो, जिंदगी बहुत छोटी है माया, समझ लो, जितना पी सकते हो, पी लो न कल का भरोसा, न खुद का माया ने उसका मेडिकल चार्ट देखा, एक्सीडेंट की रिपोर्ट पढ़ी, और फिर बिना बहस किए सिर्फ इतना कहा, तुम्हारे पापा तुमसे मिलना चाहते हैं कम से कम उनसे एक बार बात कर लो,

कुछ देर बाद जब युवान घर पहुँचा, तो हवेली कुछ अलग लग रही थी दीवारों पर टंगी उसकी बचपन की तस्वीरें अब धूल से भरी थीं एक फ्रेम में वह अपने पिता की गोद में हँस रहा था, दूसरे में ट्रॉफी पकड़े खड़ा था कमरे के अंत में एक बड़ा बिस्तर था जिस पर ऑक्सीजन मास्क लगाए जगदीश सिंह लेटे थे उन्होंने धीरे से आँखें खोलीं, और युवान को देखते ही उनकी आँखों से पानी निकल पड़ा,

“युवान बेटा” उनकी आवाज़ बहुत धीमी थी युवान कुछ पल के लिए ठिठका, फिर थोड़ी झुंझलाहट के साथ बोला, पापा, ड्रामा मत कीजिए, मैं ठीक हूँ कुछ नहीं हुआ मुझे,जगदीश ने हाथ बढ़ाकर उसका हाथ पकड़ा, उनकी उँगलियाँ काँप रही थीं। “मुझे तुम्हारी नहीं, तुम्हारे कल की चिंता है पैसा, प्रॉपर्टी, ये सब तुम्हारे बाद किसी काम के नहीं होंगे, अगर तुम खुद अपने होश में नहीं रहे,

कुछ दिन बाद, रात को दो बजे अचानक घर के अंदर अफरा-तफरी मच गई। जगदीश सिंह की हालत बहुत बिगड़ चुकी थी डॉक्टर आए, दवाई लगी, लेकिन दिल ने साथ छोड़ दिया सुबह होने से पहले ही हवेली के बाहर से रोने की आवाज़ आने लगी युवान की आँखों के सामने से पूरा बचपन एक फ्लैश की तरह गुजर गया – पापा के साथ पहली साइकिल, पहला स्कूल, पहला विदेश ट्रिप, और वो दिन जब उसने पहली बार उनके अलमारी से चोरी छुपे शराब की बोतल उठाई थी तब इसे उसने मज़ाक समझा था आज वह मज़ाक उसके जीवन का सच बन चुका था,

कुछ हफ्ते बाद, वकील ने पूरे परिवार और कुछ खास लोगों को ड्रॉइंग रूम में बुलाया भारी लकड़ी की मेज़ पर कुछ फाइलें रखी थीं वातावरण में अजीब-सी खामोशी थी वकील ने चश्मा ठीक करते हुए धीरे-धीरे वसीयत पढ़नी शुरू की, प्रॉपर्टी, फैक्ट्री, शेयर, सबका ब्योरा देता रहा, लेकिन आखिर में एक लाइन पर आकर उसकी आवाज़ थोड़ी रुक गई,

श्री जगदीश सिंह की आखिरी इच्छा के अनुसार, उनका सारा व्यवसाय, प्रॉपर्टी और संपत्ति उनके पुत्र युवान सिंह को तभी दी जाएगी, जब युवान लगातार छह महीने तक किसी भी प्रकार के नशे शराब, ड्रग्स, या किसी अन्य व्यसन से पूरी तरह दूर रहेंगे, इस दौरान उनकी निगरानी माया शर्मा और डॉ. सेन द्वारा की जाएगी, अगर युवान इस शर्त पर खरे नहीं उतरते, तो सम्पूर्ण संपत्ति एक ट्रस्ट के नाम होगी जो नशामुक्ति के काम में लगेगा,

कमरे में सन्नाटा छा गया कुछ रिश्तेदारों के चेहरे पर छुपी हुई खुशी थी कुछ को विश्वास नहीं हुआ युवान के हाथ से ग्लास लगभग छूट गया, वह जो अभी तक खुद को आज़ाद समझता था पहली बार अपने ही नशे की बेड़ियों में जकड़ा हुआ महसूस कर रहा था,

उस रात उसने अपने कमरे में जाकर शराब की बोतल उठाई, बोतल के शीशे में उसकी खुद की परछाईं दिखी लाल आँखें, सूजा हुआ चेहरा, थकी हुई मुक्की-सी मुस्कान, उसने बोतल होंठों तक उठाई, लेकिन जैसे ही जगदीश की कांपती आवाज़ याद आई, तुम्हारे बाद यह सब किस काम का, उसके हाथ लरज़ गए बोतल ज़मीन पर गिरी, और शराब फर्श पर बहने लगी, जैसे उसकी अब तक की सारी अय्याशी धीरे-धीरे कमरे से बाहर निकल रही हो,

अगले दिन माया ने उसे एनजीओ आने के लिए कहा यह वही जगह थी जहाँ दीवारों पर नशे से आज़ादी के पोस्टर लगे थे और कमरे में बैठे लोग अपनी कहानियाँ एक-दूसरे को सुनाते थे वहाँ कोई उद्योगपति का बेटा था कोई रिक्शा चालक, कोई कॉलेज का लड़का, सभी की आँखों में एक जैसी शर्म, एक जैसा पछतावा, और एक जैसी छोटी–सी उम्मीद थी युवान को पहली बार महसूस हुआ कि वह अकेला नहीं है लेकिन यह भी समझ आया कि उसकी हर हँसी के पीछे कितना बड़ा झूठ छुपा था,

दिन धीरे-धीरे गुज़रने लगे, शुरुआत में उसके हाथ काँपते थे रात को पसीना आता, सिर दर्द से फटता, गुस्सा फूट पड़ता, कई बार वह गाड़ी उठाकर सीधे क्लब की तरफ भागना चाहता, लेकिन माया बीच में खड़ी हो जाती कभी वह उसे बचपन की बात याद दिलाती, कभी उसके पिता की पुरानी तस्वीर दिखाती, जिसमें एक छोटे से युवान ने अपने पापा से वादा किया था कि वह उनकी शान बनेगा बदनाम नहीं करेगा,

छह महीने का सफ़र आसान नहीं था एक रात पुराने दोस्त अचानक उसके कमरे में घुस आए, हाथ में बोतलें लेकर,क्या बात है युवान सिंह महात्मा बन गए हैं एक पैग से क्या होगा इतनी प्रॉपर्टी, इतनी शोहरत, उसकी लाइफ इस बोतल के बिना कैसी युवान का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था दोस्तों ने बोतल को उसके हाथ में थमाया, पल भर के लिए उसने सोचा – अगर यह शर्त न होती, तो शायद वह आज भी बेफिक्र होकर पीता रहता, मगर अब बात सिर्फ संपत्ति की नहीं थी उसके पिता की आखिरी इच्छा की थी उसकी खुद की इज़्ज़त की थी, उस बच्चे की थी जो कभी इन बोतलों से दूर भागता था, उसने बोतल उठाई, सब दोस्तों की आँखों में देखा, और धीरे से बालकनी तक गया,

बालकनी से दूर शहर की लाइटें टिमटिमा रही थीं नीचे सड़क पर कुछ लोग रिक्शा खींच रहे थे कोई ठेले पर फल बेच रहा था उसे लगा कि इन सबका नशा सिर्फ मेहनत है और उसका नशा सिर्फ बर्बादी, उसने बोतल को बालकनी के रेलिंग पर रखा, एक गहरी साँस ली, और ज़ोर से बोले बिना ही बोतल को नीचे फेंक दिया। काँच टूटने की आवाज़, उसे ऐसे लगी जैसे उसके अंदर बैठा हुआ अय्याश युवान चकनाचूर हो गया हो,

छह महीने पूरे होने के दिन एनजीओ में एक छोटी-सी मीटिंग हुई। डॉक्टर ने रिपोर्ट देखी, टेस्ट हुए, सब कुछ साफ आया माया ने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा, और कहा, अब तुम्हारे पास दो रास्ते हैं एक, वापस वही पुरानी जिंदगी, जहाँ पैसे के साथ अकेलापन मुफ्त मिलता है दूसरा, कुछ ऐसा करना, जिससे तुम्हारे पापा स्वर्ग से भी मुस्कुरा सकें,

युवान ने अपना फैसला बहुत धीमी आवाज़ में सुनाया, लेकिन हर शब्द भारी था उसने वकील से कहा कि पिता की दी हुई संपत्ति में से एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाएंगे,

अब युवान उसी जगह खड़ा है, जहाँ कभी उसकी कार फिसली थी और अब हल्की-हल्की हवा चल रही है आसमान में बादल हैं धीरे-धीरे पीछे हटता है

कृपया ध्यान दें:

जो मूल फिल्म स्क्रिप्ट होगी बो अलग हो सकती है ये कहानी केवल उदाहरण के लिए है.

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One response to “AYYAS SHERA”

  1. […] कोई और कहानी पढ़ें […]

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